प्रभाववाद 19 वीं सदी का एक कला आंदोलन था।

  • प्रभाववाद 19 वीं सदी का एक कला आंदोलन था।
  • प्रभाववाद का बीजारोपण फ्रैंच कलाकार एद वार माने ने किया था।
  • प्रभाववादी चित्रकारों का प्रमुख विषय प्रकाश और वातावरण प्रकर्ति थे।
  • प्रभाववाद की रंगाकन पद्ति को इन्द्रधनुष रगाकन कहते है।
  • प्रभाववाद का बीजारोपण 1863 में हुआ।
  • 1863 में अस्वीकृति चित्रों की प्रदर्शनी में एद्वार माने का चित्र तर्ण पर भोजन रखा गया जिसकी बहुत आलोचना हुई।

पेरिस में प्रदर्शनी
1870 के करीब कुछ चित्रकार पेरिस के बतिन्योले मार्ग में काफेगेब्ब में मिलकर कला विषयक चर्चा करते और माने उनको प्रोत्सहित करते थे
इसे बतीन्योले कलाकार या प्रभाववादियों का भ्रातमंडल कहा गया।

1874 में प्रभाववाद की प्रथम प्रदर्शनी पेरिस के नडार फोटो सैलून में हुई।
2nd, 1876  मे धुरा रुएल गैलरी में हुई।
3rd, 1877
4th, 1879
5th, 1880
6th, 1881
7th, 1882
8th, 1886
कुल आठ प्रदर्शनी हुई
प्रमुख प्रभाववादी चित्रकार – क्लोद मोने, एद्वार माने, कामिय पिसारो, सिसली, देगा, रेंवार लोत्रेक, विसलर।

एद्वार माने ( 1832-1883)

  • इन्होंने चित्रकार कुतुर की चित्रशाला में प्रवेश लिया।
  • माने ने लुब्र संग्रालय जाकर विख्यात कलाकृतियों का अध्ययन किया।
  • माने का कथन था – जब मै चित्रशाला में प्रवेश करता हूं तो लगता है कब्र में प्रवेश कर रहा हूं।
  • 1865 में राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में माने का चित्र ओलम्पिया स्वीकार हुआ तो कसतान्यारी ने उसे ताश का पत्ता कहकर निंदा की।
  • माने हल्के व गहरे चित्रों को अलग अलग अंकित करते थे।
  • माने पर पुस्तक लिखी – एमिल जोला ने।
  • प्रमुख चित्र- तरण पर भोजन, ओलम्पिया, absinthe पीने वाला, बांसुरी वाला, तोते वाली स्त्री, एमिल जोला, अच्छी बीयर, नाव की
  • सवारी, जार्ज मुर का व्यक्ति चित्र, फोलिय बरजेर का मदिराग्रह स्पेनिश गिटार वादक।

क्लोद मोने (1840-1926)

  • इन्हें पेंटर ऑफ सीरीज भी कहा जाता है।
  • (प्रकृति का पागल पुजारी भी कहा गया है)।
  • 1862 में मोने ने पेरिस में ग्लेयर की चित्रशाला में प्रवेश लिया।
  • 1866में कामिल नाम की एक लड़की का व्यक्ति चित्र बनाया जो बाद में उनकी पत्नी हुई।
  • वे एक ही स्थान पर ऋतु परिवर्तन के अनुसार कई चित्र बनाते।
  • प्रमुख चित्र चिनार वरक्ष, सूर्योदय का प्रभाव,बगीचे में महिलाएं, अर्जतोई की लाल नावे।
  • चित्र मलिकाए- जीवर्णी के चिनार वरक्ष,सुखी घास के ढेर,रुआ के गिरजाघर , कुमुदनी के फूल।

कामिय पीसारो-1831-1903

  • इनका जन्म डेनिश वेस्ट इंडीज की राजधानी सेंट टोमस में हुआ।
  • 1859में पीसारो के चित्र राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में स्वीकृत हुए।
  • पीसारो को पत्वाज और ओवर के देहाती परदेस के दृश्य चित्रण विशेष प्रिय थे ।
  • 1884में उनका सोरा से परिचय हुआ जिनके प्रभाव में आकर वे बिंदु वादी चित्र बनाने लगे।
  • सोरा की कला में ऐसी नवीनता है जो कला के विकास में सहायक होगी – कामिय।
  • चित्र-। वार्तालाप ,पेरिस रुआ, ल आव्र व दिएप,स्ट्रीट एन पोंतुआ।

अल्फ्रेड सिसली 1839-1899

  • 1862 में पेरिस की ग्लेयर की चित्रशाला में प्रवेश लिया जहा रिनवार, मोने से परिचय हुआ।
  • कथन – मैं चित्रण का आरंभ आकाश से करता हू।
  • प्रमुख विषय – गांव, नदी, झरने, बगीचे आदि।
  • चित्र – बुगिवाल, आर्जतोई, लूबेशियन।

जेम्स मकनील विसलर 

  • जन्म :- अमेरिका में लोवेल शहर में 1834 में और मृत्यु 1903 में हुए थी ।
  • प्रमुख चित्र -1864 छोटी स्वेत बालिका,टेम्स नदी के निशा दृश्य,माता का व्यक्ति चित्र, टोमस कालाईल का व्यक्ति चैत्र।
  • विसलर ने अलांकारिक आकार, रंग संगति, उद्देश्य पूर्ण चित्र रचना को स्थान देकर चित्रण किया।

वाल्टर सिकर्ट (1860-1942 )

  • सिकर्ट के संगीतघरो के अन्तर्भाग ,वेनिस व दिएप के शहरी दृश्य विशेष प्रसिद्ध है।
  • चित्रों में गहरे रंगो और गहरी बाहरी रेखाओं का प्रयोग किया गया।

माक्स लिबरमैन 1847-1935

  • प्रकृति चित्रण, व्यक्ति चित्रण, कृषक जीवन के लिए प्रसिद्ध।
  • मुख्य चित्र- बकरी वाली।

मार्क्स स्लेवोट-1868-1932

  • निर्भीक तूलिका संचालन उनकी कला की विशेषता।
  • प्रभाववादी शैली में प्रकृति चित्र,वस्तु चित्र,और व्यक्ति चित्र बनाए।

लोसिव कोरिट-1858-1925

  • बाईबल और पुराणों का चित्रण।
  • वक्रगति स्पष्ट तूलिका संचालन व गहरे रंगों का प्रयोग।

एद्गार  देगा (1834-1917)

  • प्रारंभ में ऐतिहासिक विषयो पर चित्र बनाए।
  • प्रारभ में ऑयल कलर उपयोग किए ।
  • 1890 के बाद पूर्ण रूप से रंगीन खड़िया का उपयोग किया।
  • इनके चित्रों का विषय मदिराघर,वेश्याघर,घुड़दौड़ आदि थे।
  • कला का अर्थ केवल प्रकृति की शरण लेना नहीं – देगा।
  • देगा पुनर्जागरण कालीन इटालियन कलाकारों से बहुत प्रभावित थे।
  • देगा तेल चित्रण करते समय टारपेटाइन का प्रयोग करके चित्र की सतह को चमकीला और पारदर्शी रूप प्रदान करते थे।
  • ये एक मूर्तिकार भी थे ।
    प्रसिद्ध मुर्तिया – तरुण नर्तकी,दौड़ने वाला घोड़ा।
    चित्र – माने का व्यक्ति चित्र, घोड़े पर सवार महिला, जलपान गृह की गायिकाएं, युवती का शीर्ष, आत्म चित्र, बेलिल परिवार, एस्तेल म्यूसो का व्यक्ति चित्र रूई का बाज़ार ।

ओग्युस्त रेन्वार (1841-1919)

  • 1870 में रेन्वार ने छाया प्रकाश व वातावरण के प्रभाव को विशुद्ध रंगो के धब्बों में अंकित करने की पद्धति के अध्ययन को आरंभ किया।
  • चित्रकार की भावनाओ के साथ सब कुछ आता है- रेनवार।
  • चित्रों में नारी सौंदर्य का प्रतीक रूप में चित्रण किया।
  • रेंवार का चित्र जल पर्यटकों का भोजन एक ऐसा चित्र था जिसमें उन्होंने अपने मित्रो का उनकी शारीरिक विशेषता दर्शाते हुए चित्रण किया गया।
    प्रमुख चित्र – ग्रीफोन वाली स्नानमग्ना युवती, जल पर्टको का भोजन, बुगीवाल का नृत्य, पियानो पर दो युवतियां, ल मूल द ला गालेत, मादाम व उनकी पुत्रियां।

आरी द तुलुज लोत्रेक (1864-1901)

  • ये एक विज्ञापन चित्रकार थे 30से आधिक चित्र बनाए।
  • पहले रेखाकार फिर रंगाकर।
  • यदि मै  चित्रकार नहीं होता तो शलयचिकित्सक होता।
  • इन्होंने पेरिस के नृत्य घर,मदिरघर,नाटकों के सर्वाधिक चित्र बनाए।
  • इन्होंने मासिक पत्रिका लिए भी चित्र बनाए ।
    प्रमुख चित्र – पेरिस के बगीचे में जान आवरिल,मूल रुंज के अन्तर्भाग के दृश्य ,सर्कस फर्नाडो।

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Neeraj Sharma

हेलो दोस्तो, मेरा नाम नीरज शर्मा है। मैं नारनौल (हरियाणा) से हूँ। मैं इंटरनेट बहुत ज्यादा use करता हु। ओर नेट पर जो भी पढ़ता हूं वो दोस्तो के साथ शेयर करता था। फिर मैंने कुछ टाइम पहले ब्लॉग के बारे में पढ़ा और तब मुझे फील हुआ कि मुझे भी ब्लॉग बना कर जरूरी जानकारी सबके साथ शेयर करनी चाहिए ।

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