बुद्ध की विभिन्न मुद्राएँ ,हस्त संकेत तथा हस्त मुद्राओ के अर्थ

भगवान बुद्ध की 10 मुद्राएं

मुद्राओं का अर्थ और हस्त संकेत

 

dharam chakar mudra

Dharmachakra mudra

Dharmachakra mudra

इस मुद्रा का सर्वप्रथम प्रदर्शन ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में बुद्ध ने अपने पहले धर्मोपदेश में किया था ।

हस्त संकेत = इस मुद्रा में दोनों हाथों को सीने के सामने रखा जाता है तथा बाएं हाथ का हिस्सा अंदर की ओर जबकि दाई हाथ का हिस्सा बाहर की ओर रखा जाता है ।

 

 

dhyan mudra

budh dhyan mudra

budh dhyan mudra

इस मुद्रा को समाधि या योग मुद्रा भी कहा जाता है ।

यह अवस्था बुध साक्यमुनि ध्यानी बुध अमिताभ और चिकित्सक बुध की विशेषता की ओर इशारा करती है ।

हस्त संकेत= इस मुद्रा में दोनों हाथों को गोद में रखा जाता है दाएं हाथ को बाएं हाथ के ऊपर पूरी तरह से उंगलियां मिलाकर रखा जाता है तथा अंगूठे को ऊपर की ओर रखा जाता है और दोनों हाथ की उंगलियां एक दूसरे के ऊपर टिका कर रखा जाता है ।

 

 

buddha and vajra mudra

buddha and vajra mudra

यह मुद्रा उग्र वज्र  के पांच तत्वों  अर्थात वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी और धातु के प्रतीक को दर्शाती है ।

हस्त संकेत = इस मुद्रा में बाए हाथ की तर्जनी को दाई मुट्ठी में मोड़ पर ,दाएं हाथ की तर्जनी के ऊपरी भाग से दाई तर्जनी को छूते [या चारो ओर घुमाते ] हुई दिखाई देती है ।

 

 

BhumisparsaMudra

BhumisparsaMudra

इस मुद्रा को पृथ्वी को छूना टचिंग द अर्थ (Touching the earth)भी कहा जाता है ।

यह बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति के समय का प्रतिनिधित्व करती है क्योंकि इस मुद्रा से बुध दावा करते हैं कि पृथ्वी उनके ज्ञान की साक्षी है ।

हस्त संकेत=इस मुद्रा में सीधे हाथ को दाएं घुटने पर रखकर हथेली को अंदर की ओर रखते हुए जमीन की ओर ले जाया जाता है और कमल सिंहासन को छुआ जाता है ।

 

 

varda mudra

varda mudra

यह मुद्रा अर्पण, स्वागत, दान देना, दया और इमानदारी का प्रतिनिधित्व करती है ।

हस्त संकेत = इस मुद्रा में दाएं हाथ को शरीर के साथ स्वाभाविक रूप से लटका कर रखा जाता है खुले हाथ की हथेली को बाहर की और रखते हैं और और उंगलियां खुली रखकर बाएं हाथ को बाएं घुटने पर रखा जाता है ।

 

 

abhay mudra

abhay mudra

यह मुद्रा निर्भरता या आशीर्वाद को दर्शाता है जो की सुरक्षा शांति परोपकार और भय को दूर करने का प्रतिनिधित्व करता है ।

यह बुध साक्यमुनि और ध्यानी बुध अमोघ सिद्धि की विशेषताओं प्रदर्शित करती है ।

हस्त संकेत = इस मुद्रा में दाए हाथ को कंधे तक उठाकर बाँह को मोड पर किया जाता है और उंगलियों को ऊपर की ओर उठाकर हथेली को बाहर की ओर रखा जाता है ।

 

 

इसे नमस्कार मुद्रा या ह्रदयांजलि मुद्रा भी कहते हैं जो अभिवादन, प्रार्थना और आराधना के इशारे का प्रतिनिधित्व करती है ।

हस्त संकेत = इस मुद्रा में कर्ता के हाथ आमतौर पर पेट और जांघों के ऊपर होते हैं दाया हाथ बाये के आगे होता है हथेलियां ऊपर की ओर, उंगलियां जुड़ी हुई और अंगूठे एक दूसरे के अग्रभाग को छूती हुई अवस्था में होते हैं ।

 

 

vitark mudra

vitark mudra

यह बुद्ध की शिक्षाओं के प्रचार और परिचर्चा का प्रतीक है ।

हस्त संकेत = इस मुद्रा में अंगूठे के ऊपरी भाग और तर्जनी को मिलाकर किया जाता है जबकि अन्य उंगलियों को सीधा रखा जाता है यह लगभग अभय मुद्रा का की तरह है लेकिन उस मुद्रा में अंगूठा तर्जनी उंगली को ।

 

 

uttarabodhi mudra buddha

uttarabodhi mudra buddha

यह मुद्रा दिव्य सार्वभौमिक ऊर्जा के साथ अपने आप को जोड़कर सर्वोच्च आत्मज्ञान की प्राप्ति को दर्शाती है ।

हस्त संकेत = इस मुद्रा में दोनों हाथ को जोड़कर हृदय के पास रखा जाता है और तर्जनी उंगली एक दूसरे को छूते हुए ऊपर की ओर होती है और अन्य उंगलियां अंदर की ओर मुड़ी होती है ।

 

 

karan mudra

karan mudra

यह मुद्रा बुराई से बचाने की ओर इशारा करती है ।

हस्त संकेत = इस मुद्रा को तर्जनी और छोटी उंगली को ऊपर उठाकर और अन्य उंगलियों को मोड़ कर किया जाता है यह कर्ता(करने वाला)को सांस छोड़कर बीमारी या नकारात्मक विचारों जैसी बाधाओं को बाहर निकालने में मदद करती है ।

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