puran ke rachayita kaun hai. puran kitne hote hai

Dosto aaj hum purano ke bare mai baat karenge. puran ke rachayita kaun hai. puran ki sankhya kitni hai.sabse prachin puran konsa hai. aaj ka hamara topic Fine Art se related hai. is article mai hume aapko purano ke bare mai janakri dene ki ek choti se koshish ki hai. to chahiye aaj ka article “puran ke rachayita kaun hai” shuru karte hai.

पुराण के रचियता महर्षि वेदव्यास जी है। पुराण का शाब्दिक अर्थ है – प्राचीन कथा पुराणों की कुल संख्या 18 है। पुराण विश्व साहित्य के प्राचीनतम ग्रन्थ है। पुराणों का विषय – नैतिकता ,भूगोल, खगोल , राजनीती , संस्कृति , सामाजिक, कला है। पुराणों को भाषा संस्कृत है। पुराणों के मुख्य देवता ब्रम्हा विष्णुमहेश जी है।purano ke rachayita kaun hai

१. ब्रह्मापुराण :- इसे आदि पुराण भी कहा जाता है। इसमें कुल 245 अध्यय है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 10,000 है। इसमें मनु की उत्पति, उनके वंश, देवो और प्राणियों की उत्पति का वर्णन किया गया है। और इसमें तीर्थ स्थानों का भी वर्णन किया गया है। इसका प्रवचन नैमिषारण्य में लोमहर्षण ऋषि ने किया था।

२. पद्म पुराण :- पद्म पुराण कुल 641 अध्यय है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 48,000 है। पद्म पुराण में कुल 5 खण्ड है. सृष्टिखण्ड, स्वर्गखण्ड, उत्तरखण्ड, भूमिखण्ड और पातालखण्ड हैं। इसका प्रवचन नैमिषारण्य में सूत उग्रश्रवा ने किया था। सूत उग्रश्रवा लोमहर्षण ऋषि के बेटे(पुत्र) थे। इसका विकास 5वीं शताब्दी में माना जाता है।

३. विष्णु पुराण :- पद्म पुराण कुल 126 अध्यय है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 23,000 – 24,000 है। पद्म पुराण के कुल 6 खण्ड(भाग) ब्रह्मांड विज्ञान, पृथ्वी, समय, राजवंश, कृष्ण, मुक्ति है। इसका विकास 6वीं शताब्दी में माना जाता है। विष्णु पुराण के प्रवक्ता पराशर ऋषि है और विष्णु पुराण के श्रोता मेत्रय है।

विष्णु पुराण के चित्र-सूत्र में चित्रकला को सर्वोच्य स्थान दिया गया है। विष्णु पुराण में शिल्पकला और विषयक समाग्री का भंडार है। विष्णु पुराण में रंगो का भी वर्णन किया गया है।  इसमें 5  तरह के रंग (श्वेत, पीत,लाल, कृष्ण ,नीला के बारे के बारे में बताया गया है। विष्णु जी को पराम् देवता के रूप में निरूपित किया गया है।

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4. वायुपुराण / शिव पुराण :- वायुपुराण को शिवपुराण” भी कहते है। क्युकी वायुपुराण में विशेषकर शिव का वर्णन किया गया है। एक शिवपुराण पृथक भी है। वायुपुराण में कुल 112 अध्यय है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 11,000 है। वायुपुराण का प्रचलन मगध क्षेत्र में सर्वाधिक था। वायुपुराण में खगोल, युगो,ऋषियों, तीर्थो, वेद की शाखाओ, संगीत शास्त्र और शिव भक्ति का वर्णन किया गया है।

5.भागवत पुराण :- भागवत पुराण सर्वाधिक प्रचलित पुराण है। पुराण में कुल 335 अध्यय है। और इसमें श्लोकों की कुल संख्या 18,000 है। भागवत पुराण रचना 6वीं शताब्दी में माना जाता है। कुछ विद्धवान भागवत पुराण को देवी भागवत पुराण भी कहते है। क्युकी भागवत पुराण में देवी शक्ति का वर्णन किया गया है।

6. नारद(बृहन्नारदीय) पुराण :- इसे महापुराण भी कहा जाता है। नारद पुराण में 2 खंड उत्तर खण्ड और पूर्व खण्ड है। उत्तर खण्ड में 82 अध्यय है। और पूर्व खण्ड 125 अध्यय है। नारद पुराण में श्लोकों की कुल संख्या 18,000 है। इसमें वैष्णवों के उत्सवों और व्रतों का वर्णन है। नारद पुराण में मोक्ष, धर्म, नक्षत्र, व्याकरण, ज्योतिष और श्राद्ध का वर्णन मिलता है।

7 . मार्कण्डेय पुराण :- मार्कण्डेय पुराण को प्राचीनतम पुराण भी माना गया है। मार्कण्डेय पुराण में कुल 138 अध्यय है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 7,000 है।  मार्कण्डेय पुराण में इन्द्र, अग्नि, सूर्य आदि वैदिक देवताओं का वर्णन किया गया है। इसमें दिनचर्या, ग्रहस्त धर्म, निव्यकर्म, व्रत, योग, दुर्गा-महात्मय  का भी वर्णन किया गया है।

8.अग्नि पुराण :- अग्नि पुराण के प्रवक्ता अग्नि और श्रोता वसिष्ठ है। इसे भारतीय संस्कृति और विद्याओं का महाकोष माना जाता है। अग्नि पुराण में कुल 383 अध्यय है। और श्लोकों की कुल संख्या 11,500 है।  इसमें विष्णु के अवतारों का वर्णन किया गया है। अग्नि पुराण के 13 अध्यय में सिर्फ और सिर्फ मूर्तिकला पर प्रकाश डाला गया है।

9.भविष्य पुराण/विष्यपुराण :-  भविष्य पुराण में भविष्य की घटनाओं का वर्णन है। भविष्य पुराण में 2 खण्ड उत्तर खण्ड और पूर्व खण्ड है। उत्तर खण्ड में 171 अध्यय है और पूर्व खण्ड में 41 अध्यय है। भविष्य पुराण में 129 अध्याय है और श्लोकों की कुल संख्या 15,000 है। इसमें मुख्य रूप से ब्राह्मण-धर्म, आचार, वर्णाश्रम-धर्म आदि विषयों का वर्णन किया गया है। भविष्य पुराण की रचना काल 500 ई. से 1200 ई. माना गया है।

10. ब्रह्मवैवर्तपुराण :- इसे वैष्णव पुराण भी कहा जाता है। इसमें श्रीकृष्ण के चरित्र का वर्णन किया गया है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में 218 अध्याय है। और श्लोकों की कुल संख्या 18,000 है ब्रह्मवैवर्तपुराण में 4  खण्ड है। इस पुराण में ब्रह्मा, गणेश, तुल्सी, लक्ष्मी, सरस्वती तथा क़ृष्ण की महानता को दर्शाया गया है।

11 .लिङ्गपुराण :- इसमें शिव की उपासना का वर्णन है। इसमें शिव के 28 अवतारों की कथाएँ दी गईं हैं।  लिङ्गपुराण में 163 अध्याय है। और श्लोकों की कुल संख्या 11,000 है। सृष्टि की उत्पत्ति और खगौलिक काल में युग, कल्प आदि का वर्णन भी इसी काल में किया गया है। राजा अम्बरीष की कथा भी इसी पुराण में लिखी गयी थी। लिङ्गपुराण की रचना काल 8-9 शताब्दी माना गया है।

12.वराह पुराण :- वराह पुराण में विष्णु जी के वराह-अवतार का वर्णन किया गया है। वराह पुराण में 217 अध्याय है। और श्लोकों की कुल संख्या 24,000 है। इस पुराण में सृष्टि के विकास, स्वर्ग, पाताल तथा अन्य लोकों का वर्णन किया गया है। और श्राद्ध पद्धति, सूर्य के उत्तरायण तथा दक्षिणायन विचरने, अमावस और पूर्णमासी के कारणों का भी वर्णन इस पुराण में देखने को मिलता है।

13.स्कन्द पुराण :- यह पुराण शिव के पुत्र स्कन्द (कार्तिकेय, सुब्रह्मण्य) के नाम पर है। यह सबसे बड़ा पुराण है। स्कन्द पुराण में प्राचीन भारत का भूगौलिक वर्णन है जिसमें 27 नक्षत्रों, 18 नदियों, भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों, तथा गंगा अवतरण के आख्यान के बारे में बताया गया है। स्कन्द पुराण के 7 खण्ड है। इस पुराण में श्लोकों की कुल संख्या 81,000 है स्कन्द पुराण की रचना काल 7वी शताब्दी माना गया है। इसके महेश्वर और विलंभ खण्ड में शिल्प और कला के बारे में उपयोगी बाते की गयी है।

14 वामन पुराण :- इसमें विष्णु के वामन-अवतार का वर्णन है। इसमें चार संहिताएँ हैं- जैसे माहेश्वरी, भागवती, सौरी और गाणेश्वरी। वामन पुराण में कुल 95 अध्यय है। और इसमें श्लोकों की कुल संख्या 10,000 है। वामन पुराण की रचना काल 9-10 शताब्दी माना गया है। इस पुराण में वामन अवतार के बारे में विस्तार से बताया गया हैं।

15 कुर्मा पुराण :- इसमें विष्णु के कूर्म-अवतार का वर्णन किया गया है। इस पुराण में चारों वेदों के बारे में संक्षिप्त रूप में बताया गया है। कुर्मा पुराण की रचना काल 6वी शताब्दी माना गया है। इस पुराण में 2 खण्ड है। इस पुराण में ब्रह्मा, शिव, विष्णु, पृथ्वी, गंगा की उत्पत्ति के बारे में भी वर्णन किया गया है।

16 मतस्य पुराण :- इसमें कलियुग के राजाओं की सूची दी गई है। इसका रचनाकाल तीसरी शताब्दी माना गया है। मतस्य पुराण में कुल 291 अध्यय है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 14,000 है। इस काल में जल प्रलय का वर्णन किया गया है। मतस्य पुराण के 8 अध्यय में शिल्प व कला के बारे में वर्णन किया गया है।

17 गरुड़ पुराण :- गरुड़ पुराण को वैष्णवपुराण भी कहते है क्युकी इसमें विष्णु पूजा का वर्णन किया गया है। इस पुराण का प्रवक्ता विष्णु और श्रोता गरुड़ है। गरुड़ पुराण में दो खंड है। पहले खंड में 229 अध्यय है और दूसरे खंड में 35 अध्यय है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 18,000 है। इस विष्णु पूजा का वर्णन किया गया है।

18. ब्रह्माण्ड पुराण :- इसमें ब्रह्माण्ड में मौजूद ग्रहो के बारे में वर्णन किया गया है। ब्रह्माण्ड पुराण में कुल 109 अध्यय है। इसमें श्लोकों की कुल संख्या 12,000 है।  इसमें चार पाद हैं- प्रक्रिया, अनुषङ्ग, उपोद्घात और उपसंहार। ब्रह्माण्ड पुराण की रचना काल का समय 400 ई. से 600 ई.  है। इस ग्रन्थ को विश्व का पहला भूगोलशास्त्र कहा जाता है।

 

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Dosto main umeed karta hu ki aapko aaj ka article puran ke rachayita kaun hai pasand aaya hoga. agar aapko puran ke rachayita ke bare mai or jankari chahiye ya pir kuch puchna hai to niche comment kar sakte hai.

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Neeraj Sharma

हेलो दोस्तो, मेरा नाम नीरज शर्मा है। मैं नारनौल (हरियाणा) से हूँ। मैं इंटरनेट बहुत ज्यादा use करता हु। ओर नेट पर जो भी पढ़ता हूं वो दोस्तो के साथ शेयर करता था। फिर मैंने कुछ टाइम पहले ब्लॉग के बारे में पढ़ा और तब मुझे फील हुआ कि मुझे भी ब्लॉग बना कर जरूरी जानकारी सबके साथ शेयर करनी चाहिए ।

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